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Some tools to make life easier

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Thanks for the Update. I’ll Be Uninstalling Now

  Over the years, I’ve quietly walked away from several popular platforms—because those platforms slowly crossed a line. A line where user choice started being replaced by coercion, and convenience turned into control. Three incidents in particular—Instagram, Google Photos, and Microsoft Clipchamp—cemented my belief that local ownership beats cloud promises every single time. 1. Instagram: When the Platform Dictates the Art Back in 2016, Instagram only supported square photos. As someone who enjoyed landscape photography, this felt absurd. Instead of respecting the original aspect ratio, the platform forced creators to crop or compromise their work just to fit its feed. I didn’t try to adapt my photography to Instagram’s limitations. I simply stopped caring about the platform. I moved to Flickr, where photos were treated as photos—not thumbnails for attention farming. Instagram eventually deleted my account due to long inactivity, and honestly, I didn’t even notice. That’s how litt...

Ordered a 2TB Crucial SATA SSD from Flipkart (RetailNet). Received a 256GB SSD with a 2TB sticker

I’m writing this to document my experience in detail, not to rant. I did eventually get a full refund, but the process was far from smooth, and there were multiple friction points that felt deliberate. What I ordered vs what I received I ordered a Crucial 2TB SATA SSD from Flipkart (seller: RetailNet ). What I received was a 256GB SSD with a 2TB sticker pasted on it.     Physically everything looked fine: Multiple seal stickers, Clean packaging, Open-box delivery, No visible signs of tampering   But after installation and checking Disk Management , the actual usable capacity was clearly 256GB, not 2TB. Why this didn’t look like a simple “return mix-up” This was a non-returnable product . Returned items normally have return reasons logged and are not silently repacked as brand-new sealed inventory. Also, if this were an accidental return mix-up: At least one seal is usually broken or a “repacked” label...

दोस्त की शादी में न जाने के दस बहाने

  अक्सर ऐसा होता है कि हमें अपने किसी मित्र के  विवाह में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं होती है, लेकिन कोई उचित बहाना ना मिलने के कारण हमें विवाह में शामिल होना पड़ता है। अगली बार जब आप ऐसी दुविधा की स्थिति में हो तो निम्नलिखित में से कोई भी बहाना अपने सुविधानुसार उपयोग कर सकते है।   1. ऑफिस से छुट्टी ना मिलना  आपकी बहुत इच्छा थी अपने  मित्र के विवाह मे शामिल होने की, परंतु कार्यालय से अवकास ना मिलने के कारण आप शामिल नहीं  हो सके। 2. यात्रा टिकट का उपलब्ध ना होना बहुत संभव है कि आपका मित्र भारतीय रेल के टिकट की अनुपलब्धता से परिचित ही होगा। 3. उसी तारिख को परिवार के किसी अन्य सदस्य का किसी और करीबी मित्र का विवाह होना ये बहाना अत्यंत कारगर है और ज्यादातर लोग इसे ही उपयोग करते है। 4. बारिश   अचानक बेमौसम तेज बारिश की वजह से आप घर से निकल ही नहीं सके। 5. भूकंप अगर आपका मित्र एकदम लल्लू है तभी इस बहाने पे विश्वास करेगा। 6. कोरोना पॉजीटिव अगर आपके कोरोना पॉजीटिव होने की बात सुनने के बावजूद भी आपका मित्र विवाह में शामिल होने की जिद कर रहा है तो उसके माता-पित...

Advice for next Vimal advertisement

  विमल केजरीवाल जी, समाचार चैनलो के माध्यम से मुझे ज्ञात हुआ है कि विमल के ब्रांड अंबेसडर शाहरुख खान का पुत्र आर्यन खान ड्रग्स केस में जमानत पे बाहर आ गया है। मेरे पास विमल के अगले विज्ञापन के लिए एक सुझाव है।     आर्यन खान जेल से बाहर आता है और गाड़ी में सवार होता है। गाड़ी (रॉल्स रॉयस) में शाहरुख खान और अजय देवगन पहले से होते है। गाड़ी में बैठते ही आर्यन खान ड्रग्स ढ़ुंढ़ने लगता है। कई दिनों से ड्रग्स ना मिलने के कारण वह बहुत  परेशान है।    फिर अजय देवगन अपने जेब से विमल गुटखा निकाल के  आर्यन खान की तरफ बढ़ाता है।  आर्यन खान विस्मय भरी निगाहो से पहले अजय देवगन की तरफ फिर शाहरुख खान की तरफ देखता है।    शाहरूख खान अपना गर्दन टेढ़ा करके (पंकज त्रिपाठी के अंदाज में) बोलता हैं "बेटा जुंबा केसरी बोलो।" फिर अजय देवगन, शाहरूख खान और आर्यन खान एक-एक पुड़िया अपने मुंह में डालते है और  टैग लाईन आता हैं  “ड्रग्स छोड़ो और बोलो जुबां केसरी” 

सूचना और ज्ञान में अंतर

  हम प्राय: सूचना और ज्ञान को समान समझ लेते है। सूचना वो है जो हम शब्दों के रूप में किसी व्यक्ति अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त करते है, और ज्ञान वो है जो हम अपने अनुभव से प्राप्त करते है। सूचना का प्रभाव मस्तिष्क पे अल्प अवधि तक ही रहता है, जबकि ज्ञान का प्रभाव दिर्घकालीन होता है। रचनात्मक विधियों द्वारा सूचना को ज्ञान में परिवर्तित करके अग्रेषित किया जा सकता है। प्राचीन काल में अध्यापक ऐसा ही करते थे। वर्तमान समय के ज्यादातर शिक्षक महज सूचना अग्रेषित करने का माध्यम बन के रह गए है।  गुरू द्रोणाचार्य को अपने शिष्यों ये संदेश देना था कि अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करो। इसके लिए उन्होंने एक रचनात्मक विधी का प्रयोग किया था। उन्होंने वृक्ष के डाल पर एक पक्षी की प्रतिमा रख दिया और अपने शिष्यों से चिड़िया के आँख पे निशाना लगाने को कहा। तीर चलाने से पहले गुरू द्रोण ने सबसे प्रश्न किया कि उसे क्या दिख रहा है!  किसी ने कहा कि उसे वृक्ष और उसपे बैठी चिड़ियाँ दिख रही है, गुरू द्रोण ने कहा "रहने दो"।  किसी ने कहा कि उसे चिड़िया दिख रही है, गुरू द्रोण ने कहा "रहने दो"। ...

आलसी लोगों की दस विशेषताएं

  कई वर्ष पहले मैने  सोचा था कि आलस पे कुछ लिखु, लेकिन फिर आलस के कारण लिख नहीं सका था। आज आलसी व्यक्तियों की कुछ विशेषताओं से आपको अवगत कराने जा रहा हूँ। 1. वे झूठ नहीं बोलते है आलसी लोग प्राय: झूठ नहीं बोलते है। इन्हें पूर्ण रूप से यह ज्ञात होता है कि एक झूठ को छिपाने के लिए अनेक झूठों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आलस्य का अस्तित्व खतरे में आ सकता है। अत: इन लोगो को झूठ बोलने की अपेक्षा सच बोलना अधिक प्रिय होता है। 2. वे अधिक वफादार होते हैं गैर आलसी लोगों की अपेक्षा आलसी लोग अधिक वफादार होते हैं। जो स्त्री अपने पति के आलस्य  स्वभाव से परिचित रहती है वो उनके चरित्र के प्रति निश्चिंत रहती है। 3. वे अकारण किसी कार्य को जटिल नहीं बनाते हैं आलसी लोग आसान कार्य को आसान तरीके से ही करते है। वे बिना कारण आसान कार्य को जटिल नहीं बनाते है। 4. वे किसी को नुकसान नहीं पहुचाते हैं आलसी लोग प्राय: समदर्शी होते है। वे सभी जीव-जंतुओं में स्वयं को और स्वयं को सभी जीव-जंतुओं में देखते है। अत: वे किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाने कि चेष्टा नहीं करते हैं। ...