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Showing posts from May, 2021

आलसी लोगों की दस विशेषताएं

  कई वर्ष पहले मैने  सोचा था कि आलस पे कुछ लिखु, लेकिन फिर आलस के कारण लिख नहीं सका था। आज आलसी व्यक्तियों की कुछ विशेषताओं से आपको अवगत कराने जा रहा हूँ। 1. वे झूठ नहीं बोलते है आलसी लोग प्राय: झूठ नहीं बोलते है। इन्हें पूर्ण रूप से यह ज्ञात होता है कि एक झूठ को छिपाने के लिए अनेक झूठों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आलस्य का अस्तित्व खतरे में आ सकता है। अत: इन लोगो को झूठ बोलने की अपेक्षा सच बोलना अधिक प्रिय होता है। 2. वे अधिक वफादार होते हैं गैर आलसी लोगों की अपेक्षा आलसी लोग अधिक वफादार होते हैं। जो स्त्री अपने पति के आलस्य  स्वभाव से परिचित रहती है वो उनके चरित्र के प्रति निश्चिंत रहती है। 3. वे अकारण किसी कार्य को जटिल नहीं बनाते हैं आलसी लोग आसान कार्य को आसान तरीके से ही करते है। वे बिना कारण आसान कार्य को जटिल नहीं बनाते है। 4. वे किसी को नुकसान नहीं पहुचाते हैं आलसी लोग प्राय: समदर्शी होते है। वे सभी जीव-जंतुओं में स्वयं को और स्वयं को सभी जीव-जंतुओं में देखते है। अत: वे किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाने कि चेष्टा नहीं करते हैं। ...

How to get over a break up

  Getting over a breakup is one of the hardest thing faced by human mostly by teenagers. Once we get addicted to someone it becomes very hard to rearrange our live without that person. Here I am going to write some tips which not only may help to get over a breakup but also help you in long term.   1. Accept it.   Accept it in easy way. You may feel that you are facing the cruelest sorrow of the world. But believe me, you are not the first one. Just accept it as a part of live. Accept it  that the person you love has got someone better than you.   2. Clean and rearrange your room.  Now you have some extra time which you were spending at video calling or texting someone. Use that time to enhance yourself and be the better version of yourself. First step towards can be cleaning and rearranging your room. You may feel that cleaning and rearranging your room has nothing to do with getting over a breakup. But try it, it has psychological effect. 3. Read books. ...

बुद्ध का अंतिम संदेश

  "अप्प दीपो भव:" बुद्ध धर्म का एक बड़ा ही सुंदर सूत्र है। बुद्ध जब मृत्यु-शैय्या पर लेटे थे तो उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि अब मैं शरीर त्याग करने वाला हूँ अगर तुमलोगो के मन में कोई प्रश्न हो तो पूछ लो। उनके कई शिष्यों ने उनसे अपने प्रश्नों का उत्तर लिया।  बुद्ध का एक प्रिय शिष्य था आनंद, जो पिछले कई वर्षों से सदैव बुद्ध के साथ था। वो थोड़ी दूर जाके बैठ गया और रोने लगा। बुद्ध ने एक दूसरे शिष्य को भेज के आनंद को अपने पास बुलवाया और रोने का कारण पूछा। आनंद ने कहा कि आप मुझे राह दिखाते है, मैं आपके दिखाए हुए मार्ग पे चलता हूँ। जब आप नहीं होंगे तो मुझे कौन मार्ग दिखाएगा! मैं किसके दिखाए हुए मार्ग पे चलुंगा! बुद्ध ने कहा, अप्प दीपो भव: । अर्थात अपने दिये स्वयं बनो।   पूर्णिमा की उसी रात्रि को बुद्ध ने शरीर-त्याग कर दिया और निर्वाण को प्राप्त हुए। पूर्णिमा से बुद्ध के जीवन का गहरा रिश्ता रहा। उनका जन्म भी पूर्णिमा को हुआ था, आत्मज्ञान की प्राप्ति भी पूर्णिमा को हुई थी और महापरिनिर्वाण की प्राप्ति भी पूर्णिमा की रात को हुई।