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सोनम गुप्ता की बेवफाई का सच

सोनम गुप्ता की बेवफाई का सबूत है ये 10 रूपए का नोट

सोनम गुप्ता, पिछले कुछ दिनों से हर शख्स की जुबां पर ये नाम हैं। हर कोई कह रहा हैं कि "सोनम गुप्ता बेवफा हैं", मगर हैं कौन ये सोनम गुप्ता! किससे बेवफाई की उसने! क्या कारण था उसकी बेवफाई का! क्या वो सच में बेवफा थी!

मेरा एक पड़ोसी हैं, आवाज। यही हैं वो जिसने सोनम गुप्ता की बेवफाई को सहा। इसी ने सबसे पहले लिखा कि सोनम गुप्ता बेवफा हैं।

ये अगस्त 2008 की घटना हैं। उन दिनों आवाज UPSC की तैयारी किया करता था, अपने गाँव से 30 किलोमीटर दूर शहर में रहके। एक बार उसे शहर से गाँव आने के क्रम में एक लड़की मिली, सोनम गुप्ता (जो आगे चल के बहुत बड़ी बेवफा साबित हुई)। दोनों पास की सीट पे ही बैठे थे।
कंडक्टर से टिकट लेते वक्त आवाज को पता चला कि दोनों की मंजिल एक ही हैं।

आवाज सोचने लगा कि बातचीत की शरुआत कैसे की जाए। काफी सोचने के बाद भी उसे कुछ ना सूझा। फिर उसने मुझे मैसेज किया। संक्षेप में हालात का वर्णन करते हुए उसने पूछा की क्या करूँ। आवाज हमेशा से मुझे अपना महागुरु मानता हैं और हर छोटी-बड़ी चीजो में मुझसे राय लेता रहता हैं।
मैंने तुरंत संदेश का उत्तर दिया, आगे की प्रक्रिया का वर्णन करते हुए।

आवाज ने मेरे आदेशानुसार वार्तालाप का शुरुआत किया।
"हाय"
"हेल्लो"
"आई एम आवाज"
"देन व्हाट!"
"आई मीन व्हाट्स योर नेम?"
"सोनम गुप्ता"
"आप भी पिपरी जा रही हैं?"
"जी"
"कभी देखा नहीं आपको पहले कभी वहाँ!"
"जी वहाँ मेरा ननिहाल हैं"
"कहीं आपके नाना..."
"गजेंदर गुप्ता"
"अच्छा तो आप गुप्ता जी के यहाँ जा रही हैं! मैं भी वहीं पास में ही रहता हूं।"

थोड़ी ही देर में बस पिपरी चौक पहुँच गई। मैं भी बाइक पे तशरीफ़ टिका के वहीं खड़ा था। बस से पहले आवाज उतरा।
उसके पीछे एक लड़की पिंक सलवार-सूट पहने अपने दाएं हाथ से अपने बालों को कान के पीछे करते हुए उतरी। उसके बाएं हाथ में उसके ड्रेस से मैच करता हुआ एक पर्स था। 
बस से उतरते ही वो ऑटो में बैठ गई और आवाज मेरे पास आ गया। वो ऑटो की खिड़की से मुझे और आवाज को बात करते हुए देख रही थी।

शाम को हमारी मीटिंग हुई। मीटिंग में मेरे और आवाज के अलावा हमारा एक और परम-मित्र हीरा ठाकुर शामिल हुआ जिसे लोग 'हीरो' नाम से जानते हैं। अक्सर हम तीनों साथ बैठ के देश-दुनिया के विभिन्न मुद्दों पे चिंतन-मनन  किया करते हैं।

आवाज ने घोषणा किया कि उसे पहली नजर का प्यार हो चुका हैं। लेकिन सिर्फ आवाज के घोषणा कर देने से क्या होने वाला था, लड़को को तो हर दूसरे हफ्ते सच्चा वाला प्यार होते रहता हैं। बात तो तब बनती जब बंदी हाँ करे।
दो दिन बाद गजेंदर गुप्ता के बेटे यानि की सोनम के मामा की शादी थी। शादी के बाद सोनम चली जायेगी, ये तो तय था। हमें जो कुछ करना था इन्ही 2-3 दिनों में करना था। समय अल्प था और कार्य कठिन। और आवाज जैसे भयंकर डरपोंक किस्म के व्यक्ति के लिए तो ये कार्य अत्यंत दुष्कर प्रतीत हो रहा था।

हीरो को उम्मीद थी कि आवाज को पहले प्रेम में अवश्य सफलता मिलेगी। हीरो के अनुसार अगर लड़की अपना दूरभाष संख्या साँझा कर ले तो समझो की पहला पड़ाव पार कर लिया। हीरो हमलोगों के लिए सूर्यवंशम के हीरा ठाकुर से कम नहीं हैं, इसलिए प्रेम-संबंधित मामलो में अक्सर उसकी बातों को निर्विरोध मान लिया जाता हैं।

तय हुआ कि आवाज सोनम से उसका नंबर मांगेगा। अगर वो नंबर दे दी तो फिर आगे की कारवाई फ़ोन पे होगी, और अगर नंबर देने से मना कर दी तो फिर कुछ और सोचेंगे।

शादी के दिनों में घर में ढेर सारे लोग होते हैं। ऐसे में सोनम से आवाज को मिलवा पाना मुश्किल लग रहा था। आवाज़ को छत पे भेजने के बाद हमने एक बच्चे के हाथों सोनम के पास संदेश भेजा कि उसे छत पे बड़ी नानी बुला रही हैं।

सोनम छत पे पहुंची, आवाज को देखने के बाद इधर-उधर देखी मगर उसे कोई और नहीं दिखा। फिर वो आवाज की तरफ देख के मुस्कुरायी, इस मुस्कुराहट का मतलब था कि वो जान चुकी थी कि उसे आवाज से बात करने के लिये छत पे भेजा गया हैं।

आवाज ने बजाये इधर-उधर की बात करके समय गँवाने के सीधे-सीधे पूछ लिया कि कब तक हो यहाँ।
"शादी के कल होके चली जाउंगी" 
"अगर कभी तुमसे बात करने का मन हुआ तो क्या डायल करूँगा!" कहते हुए आवाज ने अपने मोबाइल का कीपैड अनलॉक किया।
आवाज को ज्यादा हैरानी नहीं हुई जब सोनम आवाज
के हाथ से उसका मोबाइल लेके अपना नंबर डायल कर दी, क्योंकि मैंने आवाज को पहले ही बता दिया था कि ऐसा करोगे तो ऐसा होगा।

विवाह सम्पन्न हुआ, सोनम गुप्ता वापस चली गई। फिर शुरू हुआ फोन पे बातों का सिलसिला। दो दिन बाद मैं बिज़नेस के सिलसिले में एक हफ्ते के लिये विदेश चला गया।
वापस आने के बाद आवाज से हाल-चाल लिया।
आवाज ने बताया कि बात बातों से आगे नहीं बढ़ी हैं। मैंने आवाज से उसका दूरभाष यंत्र लिया और सोनम गुप्ता को एक प्रेम-संदेश भेज दिया। थोड़ी ही देर में सोनम गुप्ता का सकारात्मक उत्तर आ गया। आवाज की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा।

इसके बाद दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। घंटो फ़ोन पे बातें होने लगी। लंबे-चौड़े वादों का आदान प्रदान होने लगा। कसमें खाई जाने लगी। अब जब भी आवाज मेरे साथ होता, सोनम गुप्ता की ही बातें किया करता।

6 महीने बाद आवाज और सोनम गुप्ता ने भाग के शादी करने का प्लान बनाया।
तय हुआ कि ढोली स्टेशन से दोनों ट्रेन पकड़ेंगे। ट्रेन के ढोली आने का समय सुबह 9 बजे था मगर आवाज सुबह 7 बजे ही स्टेशन पहुँच के सोनम गुप्ता का इंतजार करने लगा।

9 बज गए, सोनम गुप्ता अभी भी नहीं आई। उसका फ़ोन भी बंद आ रहा था। ट्रैन आधा घंटा लेट थी। आवाज को पूरी उम्मीद थी कि ट्रेन आने से पहले सोनम गुप्ता आ जायेगी। वो स्टेशन पे इधर से उधर भागता रहा, बार-बार सोनम गुप्ता का नंबर डायल करता रहा, लेकिन हर बार उसे यही सुनने को मिला "द नंबर यू हैव डायल्ड इज करेंटली स्विटच्ड ऑफ, प्लाज ट्राई आफ्टर सम टाइम।"

आधा घंटा विलंब से ट्रेन आई, जब ट्रेन स्टेशन पे खड़ी थी तब भी आवाज उम्मीद लगाए बैठा था कि अभी सोनम गुप्ता आएगी और कहेगी 'चलो जल्दी चलो, ट्रेन खुलने वाली हैं'। मगर ऐसा नहीं हुआ। आवाज ट्रेन को जाते हुए देखता रहा। वो शाम तक वहीं बैठा रहा मगर सोनम गुप्ता नहीं आई।
आवाज ने जेब से अपना कलम निकाला, फिर अपना बटुआ निकाला। उसमे जितने भी नोट थे, सब पे लिखा "सोनम गुप्ता बेवफा हैं"।
अगले दिन पता चला कि सोनम गुप्ता हीरा ठाकुर के साथ भाग गई हैं।

आज इस घटना के आठ साल हो चुके हैं। सोनम गुप्ता अब सोनम ठाकुर बन चुकी हैं। उसका दिन अपने तीन बच्चों की देखभाल में बीतता हैं। हीरा ठाकुर राजनीति में आ गया हैं। आवाज ऑफिसर बन गया हैं।
अब जब आवाज साथ होता हैं तो हीरा ठाकुर साथ नहीं होता और जब हीरा ठाकुर साथ होता हैं तब आवाज साथ नहीं होता। मेरी दिली इच्छा हैं कि हम तीनों फिर से साथ बैठे।

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